प्राकृतिक खेती की ओर एक नया कदम – परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY)

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परम्परागत कृषि विकास योजना जैविक खेती को बढ़ावा देकर किसानों की आय, पर्यावरण सुरक्षा और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को सुधारती है।

Robin Kumar Attri

By Robin Kumar Attri

May 20, 2025 05:26 am IST
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परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY) भारत सरकार द्वारा 2015 में शुरू की गई एक महत्वपूर्ण योजना है, इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग को कम करने के लिए प्रेरित करना है।

आज की तेज़ रफ्तार दुनिया में, जहाँ रासायनिक खेती ने फसलों की मात्रा तो बढ़ा दी है, वहीं भूमि की उर्वरता, जल स्रोतों की शुद्धता और हमारे स्वास्थ्य पर इसका दुष्प्रभाव दिखाई देता है। ऐसे समय में, परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY) किसानों के लिए एक आशा की किरण बनकर उभरी है। यह केवल खेती की पारंपरिक पद्धतियों को पुनर्जीवित नही करती,बल्कि देश को टिकाऊ कृषि की ओर ले जाने में भी मदद करती हैं।

इस योजना की खास बातें:

·       किसानों को आर्थिक सहायता: हेक्टेयर के हिसाब से किसानों को 50,000 रुपये तक की सहायता दी जाती है, जिससे वे जैविक खाद, बीज और अन्य संसाधनों की व्यवस्था कर सकें।

·       क्लस्टर आधारित मॉडल: PKVY के तहत किसानों को समूहों के भीतर संगठित किया जाता है, जिससे सामूहिक रूप से प्रशिक्षण, संसाधनों का वितरण और विपणन आसान हो जाता है।

·       प्रमाणीकरण और विपणन: किसानों को उनकी उपज का जैविक प्रमाणपत्र दिया जाता है, जिससे वे बाज़ार में उचित मूल्य पर अपनी फसल बेच सके।

क्यों जरूरी है PKVY?

भारत की कृषि परंपरा हजारों वर्षों पुरानी है, जहाँ प्रकृति के साथ तालमेल में खेती होती थी। लेकिन आधुनिक खेती की अंधी दौड़ ने ज़मीन को बंजर बनाना शुरू कर दिया है। PKVY हमें उस जड़ की ओर लौटने का अवसर देता है, जहाँ खेती केवल आमदनी का नहीं, बल्कि जीवन का आधार हैं।

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आइए और जुडिऍ इस अभियान से:

परम्परागत कृषि विकास योजना केवल सरकार की योजना नहीं, यह एकस्वस्थ जमीन, अनाज और जीवन का जनआंदोलन है। यदि आप किसान हैं, तो इस योजना का लाभ लें। यदि आप उपभोक्ता हैं, तो जैविक उत्पादों को प्राथमिकता दें। क्योंकि, एक छोटी सी जागरूकता से हम सब मिलकर एक बड़ी क्रांति ला सकते हैं।

1. उद्देश्यः

·       जैविक खेती को बढ़ावा देना : रसायन-मुक्त खेती को प्रोत्साहित करके किसानों को टिकाऊ कृषि की ओर प्रेरित करना।

·       किसानों की आय में वृद्धि करना : कम लागत में गुणवत्ता वाली उपज प्राप्त करके अधिक लाभ अर्जित करना।

·       मिट्टी की उर्वरता और स्वास्थ्य को बनाए रखना : प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग करके भूमि की उत्पादकता को बढ़ाना।

·       ग्रामीण युवाओं को कृषि से जोड़ना : प्रशिक्षण और जागरूकता के माध्यम से युवा पीढ़ी का खेती के प्रति ध्यान आकर्षित करना।

·       स्थानीय जैव विविधता का संरक्षण : परंपरागत बीज, खाद और खेती करने के तरीकों को पुनर्जीवित करना।

2. लाभः

·       रसायन मुक्त उपज: उपभोक्ताओं को स्वास्थ्य-वर्धक और सुरक्षित खाद्य सामग्री प्राप्त होती है।

·       कम लागत: रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर खर्च कम होता है।

·       बाजार में अच्छी कीमत: जैविक उत्पादों की मांग बढ़ रही है, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिलते हैं।

·       किसानों को प्रशिक्षण और समर्थन: सरकारी स्तर पर किसानों को निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन औरप्रशिक्षण शिविर, साथ ही वित्तीय सहायता भी मिलती है।

·       प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण: जल, मिट्टी और वायु को प्रदूषण से बचाया जाता है।

3. प्रभावः

·       पर्यावरणीय प्रभाव: मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार, जल स्रोतों की शुद्धता में वृद्धि, और जैव विविधता का विकास।

·       सामाजिक प्रभाव: ग्रामीण समुदायों में जागरूकता बढ़ी है, साथ ही सामूहिक खेती और सहयोग की भावना विकसित हुई है।

·       आर्थिक प्रभाव: किसानों की आमदनी में बढोतरी, लागत में कमी और बाजार में जैविक उत्पादों की मांग में तेज़ी।

·       स्वास्थ्य पर प्रभाव: जैविक उत्पादों के उपभोग से जनस्वास्थ्य में सुधार।

CMV360 कहता है:

परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY) न केवल एक सरकारी पहल है, बल्कि यह एक समग्र प्रयास है, जो पर्यावरण की रक्षा, किसानों की आय में वृद्धि और उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह योजना हमें हमारी परंपराओं से जोड़ते हुए आधुनिक चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित करती हैं यदि हम सब मिलकर इस दिशा में आगे बढ़ें, तो न केवल हमारी मिट्टी और स्वास्थ्य सुरक्षित रहेंगे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक हरित और समृद्ध भारत की नींव रखी जा सकेगी।

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