मध्य प्रदेश में शुरू हुई सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना का मकसद है छोटे किसानों को सौर ऊर्जा से जोड़ना और अब किसान अपनी जमीन पर सोलर प्लांट लगाकर खुद बिजली बना सकेंगे और इससे अतिरिक्त आमदनी भी होगी।
By Robin Kumar Attri
अब मध्य प्रदेश के छोटे किसान भी बन सकेंगे बिजली उत्पादक।
हर सब-स्टेशन की क्षमता के 100% तक लगाए जाएंगे सौर संयंत्र।
सरकार करेगी 25 साल तक तय रेट पर बिजली की खरीद।
एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत 7 साल तक 3% ब्याज में छूट।
एक लाख से ज्यादा कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जाएगा।
इस योजना का मकसद है खेती की लागत को कम करना, सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना और किसानों के लिए आमदनी का एक नया, भरोसेमंद जरिया तैयार करना।
मध्य प्रदेश सरकार ने 'सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना' के ज़रिए छोटे किसानों को एक बड़ा मौका दिया है, सौर पैनल और सोलर पंप जैसे उपायों पर पहले ही केंद्र और राज्य सरकारें सब्सिडी दे रही हैं मकसद यही है कि खेती की लागत कम हो, किसान को सस्ती बिजली मिले, और देश को साफ ऊर्जा का रास्ता मिले। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए, राज्य के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला जी ने किसानों के लिए ये नई योजना शुरू की है।
इस योजना के तहत, पावर ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों को सीधे बिजली की आपूर्ति करने के लिए फीडरों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जाएंगे, जिससे किसानों को कई तरह से मदद मिलेगी:
खेतों में दिन के समय भी सस्ती और लगातार बिजली मिलेगी।
किसान अतिरिक्त बिजली सरकार को बेचकर कमाई कर सकेंगे।
ये योजना प्रदेश में हरित ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) को भी बढ़ावा देगी।
मंत्री जी का कहना है कि इससे किसानों को आर्थिक ताकत मिलेगी और मध्य प्रदेश सौर ऊर्जा में देश के सबसे आगे के राज्यों में शामिल होगा।
हर पावर सबस्टेशन की पूरी क्षमता तक सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जाएंगे।
इसमें स्थानीय निवेशकों और किसानों को भी हिस्सा लेने का मौका मिलेगा।
सरकार और किसान के बीच 25 साल का बिजली खरीद समझौता होगा यानी लंबी अवधि की आय तय होगी।
1900+ सबस्टेशन पर कुल 14,500 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं खुली हैं यानी काफी बड़ा स्कोप है।
सरकार ने किसानों और निवेशकों की सहायता के लिए वित्तीय सहायता शुरू की है:
सरकार एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत 3% ब्याज में 7 साल तक कि छूट दे रही है।
बैंकों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से मिलकर आसान लोन की सुविधा बनाई गई है।
साथ ही, GIZ जैसे संगठनों की मदद से सोलर प्लांट लगाने वाले डेवलपर्स को ट्रेनिंग भी दी जा रही है।
प्राथमिक लक्ष्यसूर्य मित्र कृषि फीडर योजनापावर ग्रिड पर कृषि भार का प्रबंधन करना और दिन के समय सिंचाई के लिए निरंतर बिजली सुनिश्चित करना है, इस योजना से कई फायदे मिलते हैं:
11 केवी फीडर से सीधी सप्लाई होगी, जिससे वोल्टेज की दिक्कतें और ट्रांसफॉर्मर की ओवरलोडिंग कम होगी।
सब-स्टेशन अपग्रेड और नए ट्रांसफॉर्मर पर तत्काल खर्च कम हो जाएंगे।
एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड को सस्ती बिजली मिलेगी, जिससे सरकार का सब्सिडी का बोझ कम होगा।
प्रत्यक्ष ऊर्जा आपूर्ति ट्रांसमिशन घाटे में कटौती करेगी, ट्रांसफॉर्मर ओवरलोडिंग को कम करेगी, कम वोल्टेज की समस्याओं को रोकेगी और बिजली कटौती को कम करेगी।
अभी तक 8000 कृषि फीडर बन चुके हैं।
राज्य में करीब 35 लाख पंप कनेक्शन हैं, जिन्हें अब सौर ऊर्जा से जोड़ा जाएगा।
कृषि पंपों को सीधे बिजली की आपूर्ति करने के लिए इन फीडरों पर सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी।
80 मेगावाट की परियोजनाएं काम कर रही हैं, 16,000 से ज्यादा किसान इसका फायदा उठा रहे हैं।
240 मेगावॉट की कुल क्षमता वाली परियोजनाएं स्थापित की जा रही हैं, और 200 मेगावॉट की अन्य परियोजनाएं प्रगति पर हैं।
आने वाले समय में 1 लाख से ज्यादा कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से चलाया जाएगा।
‘सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना’ सिर्फ एक बिजली योजना नहीं है, यह किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। खेती से जुड़ी कमाई में अब बिजली उत्पादन भी जुड़ जाएगा। साथ में पर्यावरण के लिए भी अच्छा है साफ और हरित ऊर्जा की तरफ एक ठोस कदम।
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सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना छोटे किसानों के लिए एक सुनहरा मौका है जिससे वो अपनी ज़मीन पर सौर ऊर्जा पैदा कर सकते हैं, जिससे उन्हें दिन में भरोसेमंद बिजली, सिंचाई की स्थिर सुविधा और साथ ही अतिरिक्त कमाई भी मिलेगी। यह योजना खेती की लागत को घटाती है और किसानों को एक नई दिशा देती है,जिससे सिर्फ किसान ही नहीं, राज्य का बिजली सिस्टम भी मजबूत होगा और साफ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा।
लेखक के बारे में
Robin Kumar Attri is a content and video professional with 2.7 years of experience in the commercial vehicle domain. At CMV360, he creates news articles and videos covering trucks, tractors, buses, three-wheelers, and infrastructure machines.
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