PAU ने AI-संचालित सेल्फ-ड्राइविंग ट्रैक्टर का खुलासा किया जो दक्षता को बढ़ाता है, श्रम को कम करता है और उन्नत तकनीक के साथ पर्यावरण के अनुकूल खेती का समर्थन करता है।
By Robin Kumar Attri
AI ट्रैक्टर GPS, सेंसर और स्मार्ट कंप्यूटर पर चलता है।
जुताई, बुवाई और बाधा से बचाव करता है।
सटीकता के लिए GNSS- आधारित ऑटो-स्टीयरिंग सिस्टम का उपयोग करता है।
किसान की थकान में 85% और श्रम में 40% की कटौती करता है।
बिना पुआल जलाए PAU स्मार्ट सीडर को संचालित कर सकते हैं।
2025 में,भारतीय कृषिइस क्षेत्र में तेजी से तकनीकी प्रगति हो रही है, जिसमें प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियां शामिल हैंमहिन्द्राऔरजॉन डीरेउन्नत ट्रैक्टर पेश करना। लेकिन अब, एक बड़ी सफलता सामने आई हैपंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (PAU), जिसने एआई-संचालित, सेल्फ-ड्राइविंग ट्रैक्टर विकसित किया है।जहां दुनिया भारत में Tesla की सेल्फ-ड्राइविंग कारों का इंतजार कर रही है, वहीं PAU पहले ही भारतीय खेतों में स्वायत्त तकनीक ला चुका है। यह ट्रैक्टर किसानों के लिए डिजिटल पार्टनर बनकर मानवीय भागीदारी के बिना काम कर सकता है।
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पीएयू के वाइस चांसलर सतबीर सिंह गोसल के मुताबिक, यह ऑटोमैटिक ट्रैक्टर जीपीएस, सेंसर और स्मार्ट कंप्यूटर की मदद से चलता है। यह बिना ड्राइवर के फील्डवर्क कर सकता है, ऐसे कार्यों को संभाल सकता है जिनमें आमतौर पर किसानों को गहन श्रम और समय की आवश्यकता होती है। यह AI ट्रैक्टर निम्न कर सकता है:
खेतों को स्वचालित रूप से हल करें।
डिस्क हैरो, कल्टीवेटर और रोटावेटर जैसे सामान्य कृषि उपकरण संचालित करें।
बीजों को कुशलता से बोएं।
मानव नियंत्रण के बिना बाधाओं का पता लगाएं और उनसे बचें।
दट्रैक्टरएक उन्नत का उपयोग करता हैGNSS (ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम)आधारित ऑटो-स्टीयरिंग सिस्टम, जिसका अभी तक भारत में व्यापक रूप से उपयोग नहीं किया गया है। किसानों को शुरुआती इनपुट प्रदान करने की आवश्यकता होती है, और फिर ट्रैक्टर सैटेलाइट सिग्नल, सेंसर और ISOBUS- संगत टचस्क्रीन कंसोल का उपयोग करके सटीक रूप से नेविगेट करता है। यह सिस्टम खराब दृश्यता की स्थिति में भी सुचारू रूप से संचालन सुनिश्चित करता है, जैसे कि धुंधली सुबह या रात के काम के दौरान।
AI ट्रैक्टर PAU स्मार्ट सीडर को भी संचालित कर सकता है, जो एक कृषि उपकरण है जिसे बिना जलाए सीधे चावल के अवशेषों (धान के भूसे) में गेहूं बोने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने में मदद करता है और पर्यावरण के अनुकूल खेती को बढ़ावा देता है।
पीएयू के डीन मंजीत सिंह ने भारतीय किसानों के लिए इस तकनीक के कई फायदों पर प्रकाश डाला:
क्षेत्र की दक्षता में 12% तक की वृद्धि हुई।
किसानों की थकान 85% तक कम हुई।
श्रम की आवश्यकता में 40% की कमी आई।
खेती के कार्यों में ओवरलैप 3% से घटकर 1% हो गया।
असिंचित क्षेत्र क्षेत्र 2-7% से घटकर 1% से कम हो गया।
कुलपति गोसल ने ट्रैक्टर का प्रदर्शन किया, इस बात पर जोर देते हुए कि इसे सटीक खेती के लिए विकसित किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि AI के साथ, ट्रैक्टर अब खेत के वातावरण के आधार पर स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकता है।
एक अमेरिकी कंपनी के सहयोग से विकसित, यह AI- संचालित ट्रैक्टर भारत में डिजिटल खेती की दिशा में एक बड़ा कदम है। PAU ने देश भर के शीर्ष कृषि मेलों और कार्यक्रमों में इस तकनीक को प्रदर्शित करने की योजना बनाई है, जिससे किसानों में जागरूकता फैलाने और इसे अपनाने में मदद मिलेगी। गोसल ने उम्मीद जताई कि भारतीय ट्रैक्टर निर्माता इस तकनीक को अपनाएंगे और इसे और विकसित करेंगे।
पीएयू के अनुसंधान निदेशक, अजमेर सिंह दत्त ने कहा कि यह नवाचार भारतीय कृषि का भविष्य है। इस तरह की तकनीकें, जो पहले से ही कई विदेशी देशों में आम थीं, अब भारत में प्रवेश कर रही हैं, जिससे आधुनिक कृषि क्रांति का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।
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पीएयू का एआई-सक्षम ट्रैक्टर भारतीय खेती के लिए एक मील का पत्थर है, जो खेतों में सेल्फ-ड्राइविंग तकनीक लाता है। यह नवाचार उच्च दक्षता, श्रम लागत में कमी और पर्यावरण के अनुकूल प्रथाओं का वादा करता है। जैसे ही भारत डिजिटल कृषि के युग में कदम रख रहा है, ऐसी स्मार्ट मशीनें खेती के भविष्य को बदलने के लिए तैयार हैं।
Q1। PAU का नया AI ट्रैक्टर कैसे काम करता है?
A. AI ट्रैक्टर GPS, सेंसर, स्मार्ट कंप्यूटर और GNSS- आधारित ऑटो-स्टीयरिंग सिस्टम का उपयोग करके संचालित होता है।
Q2। क्या ट्रैक्टर बिना ड्राइवर के चल सकता है?
उत्तर: हां, 2025 में, AI तकनीक ट्रैक्टरों को बिना ड्राइवर के चलाने में सक्षम बनाती है।
Q3। भारत का पहला सेल्फ-ड्राइविंग ट्रैक्टर किसने बनाया?
A. AutoNXT ने भारत में पहला सेल्फ-ड्राइविंग ट्रैक्टर पेश किया।
Q4। क्या मशीनें इंसानों को खेतों में बदल देंगी?
उत्तर: हालांकि यह स्वायत्त ट्रैक्टरों की शुरुआत है, मशीनें भविष्य में कुछ कार्यों में मनुष्यों की तेजी से सहायता कर सकती हैं या उनकी जगह ले सकती हैं।

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