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सरकार ने दिसंबर 2026 तक प्राकृतिक शहद पर न्यूनतम आयात मूल्य बढ़ाया

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सरकार सस्ते आयात पर अंकुश लगाने, घरेलू उत्पादकों का समर्थन करने और भारतीय शहद बाजार में उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए दिसंबर 2026 तक प्राकृतिक शहद पर न्यूनतम आयात मूल्य बढ़ाती है।

Robin Kumar Attri

By Robin Kumar Attri

Apr 15, 2026 13:24 pm IST
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Honey Import MIP Extended Till December 2026 by the Govt
सरकार ने दिसंबर 2026 तक प्राकृतिक शहद पर न्यूनतम आयात मूल्य बढ़ाया

मुख्य हाइलाइट्स:

  • प्राकृतिक शहद पर MIP को 31 दिसंबर, 2026 तक बढ़ाया गया।

  • आयात मूल्य 1,400 अमेरिकी डॉलर प्रति मीट्रिक टन (एफओबी) तय किया गया।

  • इस कदम का उद्देश्य सस्ते शहद के आयात को रोकना है।

  • घरेलू किसानों और उत्पादकों को फायदा होगा।

  • DGFT ने पशु उत्पादों के लिए नए निर्यात नियम जोड़े हैं।

केंद्र सरकार ने प्राकृतिक शहद के आयात को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिससे देश के किसानों और घरेलू उत्पादकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार ने शहद पर लागू न्यूनतम आयात मूल्य (MIP) की अवधि को बढ़ाकर अब 31 दिसंबर 2026 तक कर दिया है।

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क्या है सरकार का नया फैसला?

सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, Directorate General of Foreign Trade (DGFT) ने स्पष्ट किया है कि प्राकृतिक शहद पर 1400 अमेरिकी डॉलर प्रति मीट्रिक टन (FOB) का न्यूनतम आयात मूल्य पहले की तरह ही लागू रहेगा। हालांकि, इसकी समय सीमा को आगे बढ़ाते हुए अब दिसंबर 2026 तक प्रभावी कर दिया गया है।

इससे पहले यह व्यवस्था केवल सीमित अवधि के लिए लागू थी, जिसे अब विस्तारित कर दिया गया है।

सस्ते आयात पर लगेगी रोक

इस फैसले का मुख्य उद्देश्य विदेशी बाजारों से आने वाले सस्ते शहद के आयात को नियंत्रित करना है। कम कीमत वाले आयात से घरेलू बाजार प्रभावित होता था, जिससे स्थानीय उत्पादकों को उचित दाम नहीं मिल पाते थे।

अब MIP लागू रहने से ऐसे सस्ते आयात पर रोक लगेगी और बाजार में संतुलन बना रहेगा। इससे देश के शहद उत्पादकों और किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी।

घरेलू उत्पादकों को मिलेगा फायदा

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से बाजार में अनुचित प्रतिस्पर्धा कम होगी। जब सस्ते आयात सीमित होंगे, तब स्थानीय उत्पादकों को अपने उत्पाद का उचित मूल्य मिल सकेगा।

यह निर्णय खास तौर पर छोटे और मध्यम स्तर के शहद उत्पादकों के लिए लाभकारी माना जा रहा है, जो लंबे समय से सस्ते आयात के कारण दबाव में थे।

DGFT ने निर्यात नियमों में भी किया बदलाव

इसी के साथ DGFT ने एक अलग अधिसूचना में पंख, खाल और अन्य पशु उत्पादों के निर्यात से जुड़े नियमों में भी अतिरिक्त शर्तें जोड़ी हैं। इन शर्तों का विस्तृत विवरण अलग से जारी किया गया है, जिससे निर्यात प्रक्रिया को अधिक नियंत्रित और पारदर्शी बनाया जा सके।

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निष्कर्ष

सरकार का यह कदम घरेलू शहद उद्योग को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल है। MIP की अवधि बढ़ने से न केवल सस्ते आयात पर नियंत्रण होगा, बल्कि देश के किसानों और उत्पादकों को भी स्थिर और बेहतर बाजार मिलने की उम्मीद है।

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Robin Kumar Attri
Senior Correspondent

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